Wednesday, November 25, 2020
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अपने हाथों से क्रिकेट वर्ल्ड कप उठाने वाला क्रिकेटर अब बेचता है सब्जी

कभी अपने हाथों से क्रिकेट वर्ल्ड कप उठाने वाला क्रिकेटर अब बेचता है सब्जी,कभी अपने हाथों से उठाया था क्रिकेट विश्व कप लेकिन अब सब्जी बेचने को मजबूर हैं। गुजरात के नरेश भाई तूमड़ा

पूरे भारत में कम ही लोग जानते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने वर्ष 2018 में नेत्रहीन क्रिकेट विश्व कप जीता था मार्च 2018 में शारजहां क्रिकेट स्टेडियम में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर नेत्रहीन भारतीय क्रिकेट टीम ने 2018 नेत्रहीन विश्व कप जीता है।  नेत्रहीन  भारतीय क्रिकेट टीम ने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को रोमांचक मुकाबले में 2 विकेट से हराकर नेत्रहीन विश्वकप 2018 अपने नाम किया था और उसी विश्व विजयी टीम के प्लेइंग इलेवन में शामिल खिलाडी नरेश भाई तुमड़ा आज गुजरात की अहमदाबाद के जमालपुर  सब्जी मार्केट में सब्जी बेचने के लिए मजबूर हैं।

विश्व कप जितने के बाद सरकार से नौकरी के पेशकश की थी उम्मीद।

2018 नेत्रहीन विश्व कप टीम के प्लेइंग इलेवन में शामिल नरेश समेत इस विश्व विजेता टीम के स्क्वाड में शामिल सभी खिलाड़ियों को यह उम्मीद थी सरकार द्वारा सभी खिलाड़ियों को नौकरी की पेशकश की जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। विश्वकप जीतने के बाद न तो सरकार ने खिलाड़ियों को तोहफे दिए और न ही नौकरी की पेशकश की। इस प्रकार सरकार के उदासीनता से नरेश का पूरा परिवार हताश हो गया था।

लॉक डाउन की वजह से परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ा बुरा असर

नेत्रहीन विश्व कप खेलने वाले क्रिकेटर नरेश के परिवार पर कोरोना महामारी के बीच सरकार द्वारा लॉक डाउन लगा देने की वजह से आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा नरेश के परिवार में 5 लोग हैं जिन की संपूर्ण जिम्मेदारी नरेश के ऊपर ही है। ऐसे में रोज की नौकरियों से कमाई एवं महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के काम काम एवं मंदी के कारण नरेश के पास लॉकडाउन में सब्जी बेचने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था तब नरेश ने सब्जी बेचने का काम शुरू किया। वैसे लॉकडाउन में न जाने कितने व्यापारियों ने सब्जी बेचने का काम शुरू किया था।

दो साल में कितना बदल गया नरेश का जीवन 

नेत्रहीन भारतीय क्रिकेट टीम के क्रिकेटर नरेश भाई के जीवन में कितना बड़ा बदलाव हुआ है यह इस बात से पता चलता है कि जिन हाथों ने वर्ष 2018 में नेत्रहीन क्रिकेट विश्वकप उठाया था । अब वह सब्जियों को तराजू पर तोलता है। उस समय नरेश भाई के में पर क्या बीतता होगा,जब कोई उनसे क्रिकेटर होने का जिक्र करता होगा,की आप तो क्रिकेट खेलते थे और आज सब्जी क्यों बेच रहे है। विश्व कप जीतने के बाद ना जाने कितनों ने नरेश भाई से उनके सपनों के बारे मैं पूछा होगा ,और नरेश भाई ने अपने सभी सपनों को उनको बताया होगा। तब शायद नरेश भाई यह नहीं जानते होंगे कि एक दिन ऐसा भी आएगा की जिन हाथों ने वर्ल्ड कप थामे है,उन्हें एक दिन सब्जी बेचने के लिए तराजू भी थामना होगा। इस सब परिस्थिति पर नेत्रहीन क्रिकेट टीम के क्रिकेटर नरेश का कहना है कि यदि सामान्य भारतीय क्रिकेट टीम विश्व कप जीतती है, तो सरकार न जाने कितने तोहफों और पैसों की बारिश क्रिकेटर के ऊपर करती है लेकिन नेत्रहीन क्रिकेटरों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जाता है ।यह मेरी समझ में नहीं आता है यह भेदभाव सरकार के लिए ठीक नहीं है। अब जरा आप ही सोचिए कि 2 साल पहले जिन हाथों ने क्रिकेट विश्व कप को उठाया था। उसे आज सब्जियां बेचने के लिए मजबुर होना पड़ा है।यह भारतीय सरकारी तंत्र की बहुत बड़ी नाकामी है।यह केवल नेत्रहीन क्रिकेटरों के लिए नहीं अपितु उन सभी खिलाड़ियों एवं प्रतिभावान व्यक्तियों के लिए हर संभव मदद पहुंचाने के लिए सरकार को सोचना चाहिए ताकि आगे कोई नरेश तूमड़ा सब्जी बेचता हुए न दिखाई दे।

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