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Thursday, June 24, 2021

शारदीय नवरात्र 2020 : 17 अक्टूबर से प्रारंभ होगा माता दुर्गा अत्यंत पावन पर्व शारदीय नवरात्र,जाने कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

17 अक्टूबर से प्रारंभ होगा माता दुर्गा अत्यंत पावन पर्व शारदीय नवरात्र,जाने कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, का प्रारंभ शनिवार से हो रहा है। व्रत पूजा – पाठ करने से माता दुर्गा सभी कष्ट हारती है। नवरात्र नौ दिनों माता दुर्गा का अत्यंत पवित्र – पावन उत्सव होता है।

माता दुर्गा का 9 दिनों तक अलग – अलग रूपों में पूजा कि जाती है। माता नवग्रहों से संबंधित बाधाओं के अतिरिक्त अपने भक्तों कि सभी बाधाओं को हर लेती है।  वैसे हर वर्ष माताजी का यह पर्व वर्ष भर में दो बार आता है एक बार इसे चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में मनाते है। जिसे वासंतिक नवरात्र कहा जाता है। दूसरी बार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। जिसे हम शारदीय नवरात्रि कहते है। सभी भक्तजन नवरात्रि पर्व को बड़े धूम-धाम से मनाते हैं। समस्त भक्तजन नवरात्रि को बड़े निष्ठा से मनाते है तथापि नौ दिवस तक व्रत भी रहते है। माता की नौ दिन पूजा अर्चना नवरात्रि में करना अत्यंत लाभदायक होता है। श्रद्धालु इस पर्व में माता का पंडाल सजाते हैं,उनकी मूर्ति स्थापित करके उनका प्रत्यक्ष रूप से पूजन करते तथा जागरण करके माता का भजन कीर्तन भी किया करते है किन्तु इस वर्ष कोरोनावायरस महामारी के कारण भक्तों को कई प्रकार के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। कई जगहों पर दुर्गा पूजा में पंडाल सजाने के लिए मना किया गया है।

17 अक्टूबर से प्रारम्भ होगा शारदीय नवरात्रि 

इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से प्रारम्भ हो रहा है। शनिवार को प्रतिपदा तिथि के साथ ही माता दुर्गा के इस पावन पर्व शारदीय नवरात्रि का आरंभ होगा। पहले दिवस माता दुर्गा के स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन कलश – स्थापना का महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है। कोई भी मांगलिक कार्य शुभ समय और तिथि में होना अत्यंत महत्वपूर्ण है इसी तरह माता शैलपुत्री के स्वरूप के पूजन के दिन कलश स्थापना करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुभ मुहूर्त में से अच्छा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त को भी माना जाता है। जो शनिवार को अपराह्न 11.36 मिनट से 12.24 मिनट तक रहेगा। स्थिर लग्न चित्रा नक्षत्र की समाप्ति दिन में 2.20 बजे के बाद किया का सकेगा। कुंभ नक्षत्र 2.30 बजे से 3.55 तक रहेगा इसी के साथ शुभ चौघड़िया प्राप्त होगा। यह समय भी कलश – स्थापना के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है।

घोड़े की सवारी पर होगा माता दुर्गा का आगमन

माता दुर्गा का इस नवरात्रि में आगमन घोड़े की सवारी पर होगा। जो राष्ट्र और आस – पास एवम पड़ोस के लोगो में विवाद का कारण बन सकता है। इससे भक्त जन विवादों से बचे तथा माता दुर्गा का ध्यान करते रहे। माता दुर्गा सभी भक्तों का कष्ट काटती है। इससे इस अशुभ संकेत से बचकर निर्भीक होकर माता दुर्गा का स्मरण करते रहे माता दुर्गा समस्त विघ्नों को दूर करेगी। नवरात्रि के प्रत्येक दिवस माता दुर्गा का पूजा – पाठ,ध्यान एवम भजन – कीर्तन करते रहे। शांति के वातावरण का अनुसरण करे और शांत मन से ही माता का ध्यान करे।

माता दुर्गा का गमन डोली अथवा पालकी से है।

माता दुर्गा का नवरात्रि संपत होने के बाद उनका गमन डोली अथवा पालकी से है। जिसके कारण हमारे शास्त्रीय विचार शुभ संकेत नहीं देते है किन्तु यदि आप माता दुर्गा का ध्यान करेंगे तो जगत जननी मां अम्बे आप के सभी कष्टों का निवारण कर देंगी।

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